भोपाल। प्रदेश की मुख्य सचिव वीरा राणा को छह महीने का एक्सटेंशन देने के लिए राज्य सरकार जल्द ही केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजेगी। मंत्रालय के सूत्रों का दावा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने फरवरी के पहले सप्ताह में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान मुख्य सचिव के एक्सटेंशन को लेकर चर्चा कर ली थी, जिससे लगभग तय माना जा रहा है कि राणा 30 सितंबर 2024 तक मुख्य सचिव रहेंगी। उनके एक्सटेंशन का आदेश लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से पहले जारी हो जाएगा।
मुख्य सचिव वीरा राणा का रिटायरमेंट 31 मार्च को होना है। यदि राज्य सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो वे छठवीं मुख्य सचिव होंगी, जिन्हें एक्सटेंशन मिलेगा। राणा से पहले तत्कालीन शिवराज सरकार ने मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस को दो बार 6-6 महीने का एक्सटेंशन दिया था। बैंस के दूसरे एक्सटेंशन का पीरियड 30 नवंबर को पूरा होने के बाद वीरा राणा को मुख्य सचिव का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था।
नई सरकार के गठन होने और 13 दिसंबर को डॉ. मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद माना जा रहा था कि वे अपनी पसंद के मुख्य सचिव को पदस्थ करेंगे। एक महीने से ज्यादा वक्त तक वीरा राणा प्रभारी मुख्य सचिव ही रहीं। दरअसल, केंद्र सरकार ने जनवरी महीने में राणा के ही बैच 1988 के सीनियर आईएएस अफसर संजय बंदोपाध्याय की प्रतिनियुक्ति समाप्त कर मध्यप्रदेश में पदस्थ कर दिया था। ऐसे में कयास लगाए जाने लगे थे कि बंदोपाध्याय को मुख्य सचिव बनाया जा सकता है, लेकिन मुख्यमंत्री ने राणा पर भरोसा जताया। 17 जनवरी को राणा को मुख्य सचिव बनाने का आदेश जारी किया गया जबकि बंदोपाध्याय को कर्मचारी चयन मंडल का अध्यक्ष बनाया गया।
मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव दोनों ही नए थे। अब दोनों के बीच सरकारी कामकाज को लेकर आपसी तालमेल बेहतर हो गया है, इसलिए सरकार राणा को 6 महीने का एक्सटेंशन देने की सिफारिश केंद्र सरकार से कर रही है। राणा को मुख्य सचिव बनाने का आदेश जारी करने में एक महीने से ज्यादा का वक्त लगने की वजह भी यही है।
वीरा राणा के एक्सटेंशन को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय और राज्य सरकार के बीच सैद्धांतिक सहमति बन गई है। केंद्र सरकार लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लगने से पहले राणा के एक्सटेंशन का आदेश जारी करेगी। चुनाव की घोषणा मार्च के दूसरे सप्ताह तक होने का अनुमान लगाया जा रहा है। राणा 31 मार्च को रिटायर होंगी। ऐसे में उनकी सर्विस एक्सटेंशन के आदेश के लिए चुनाव आयोग की अनुमति लेनी होगी।
नियम के अनुसार, आचार संहिता लागू होने के बाद आयोग को जो प्रस्ताव भेजा जाएगा, उसमें सरकार को मुख्य सचिव पद के लिए पैनल बनाकर भेजना पड़ेगा। आयोग अमूमन सबसे वरिष्ठ अधिकारी को ही वरीयता देता है इसलिए सरकार इस प्रक्रिया से बचना चाहती है।
