Monday, 13 April

भोपाल। छतरपुर जिले में पदस्थ डिप्टी कलेक्टर निशा बांगरे अपना इस्तीफा मंजूर कराने के लिए न्याय यात्रा पर पैदल निकल पड़ी हैं। वह बैतूल जिले के आमला से पैदल चलते हुए भोपाल में सीएम हाउस तक जाएगी। करीब 335 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा के बाद वह 9 अक्टूबर को भोपाल में सीएम हाउस के सामने आमरण अनशन करेगी। निशा बांगरे आमला विधानसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहती है। उन्होंने 22 जून को डिप्टी कलेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया था। लेकिन सरकार ने अब तक उनका इस्तीफा मंजूर नहीं किया है।

निशा बांगरे ने मध्यप्रदेश सरकार पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार की सद्बुद्धि के लिए मैंने यज्ञ की शुरुआत भी की है। मेरे मामा यहां पर भूख हड़ताल पर भी बैठ रहे हैं। वह इसलिए कि सरकार एक भांजी पर अत्याचार ना करें। अब मैं भोपाल पहुंचकर आमरण अनशन शुरू करूंगी। इसके लिए मैं मुख्यमंत्री के गृह ग्राम जैत होकर जाऊंगी। मेरी यह पद यात्रा 9 अक्टूबर तक चलेगी।

निशा बांगरे ने बैतूल में तीन दिन पहले रैली निकालकर धरना भी दिया था। उन्होंने यहां अनशन और पद यात्रा निकालने का ऐलान किया था।

मजबूरी में मुझे सड़क पर उतरना पड़ रहा

निशा बांगरे ने कहा कि मैंने 22 जून को मैंने इस्तीफा दिया था। 3 महीने से ज्यादा बीत चुके हैं। सोमवार के दिन मैंने बैतूल पहुंचकर शासन को तीन दिन का समय दिया था। लेकिन इस पर भी मेरी गुहार नहीं सुनी गई। अब मुझे मजबूरी में सड़क पर उतरना पड़ रहा है। अब मैं आमला से मुख्यमंत्री निवास तक पैदल जाऊंगी।

हाईकोर्ट ने दिए ये आदेश

महिला अधिकारी ने कहा कि हाईकोर्ट ने आदेश दिए हैं कि 10 दिन में मेरी जांच खत्म करनी है। 9 अक्टूबर को इस जांच को हाईकोर्ट के सामने सब्मिट करना है, लेकिन मुझे मध्य प्रदेश शासन की मंशा पर शक है। जिस तरह शासकीय अधिवक्ता अदालत को गुमराह कर रहे हैं। उससे मुझे शक हो रहा है। वह कह रहे हैं कि इस्तीफा स्वीकार करने के लिए पहले एमपीपीएससी से सहमति लेना जरूरी है।

इस्तीफा मंजूर कराने के लिए तीन महीने से इंतजार

हाल ही में एक डॉक्टर को उम्मीदवार बनाने के लिए एक ही दिन में सरकार ने इस्तीफा मंजूर किया और उसी दिन उन्हें टिकट दे दिया। उनके मामले में सरकार को एमपीपीएससी से सहमति की जरूरत नहीं पड़ी। जबकि मैं तीन महीने से इंतजार कर रही हूं। वे चाहते हैं कि मेरा इस्तीफा पेंडिंग पड़ा रहे, इसलिए उन्होंने अदालत से समय मांगा है। इसलिए अब परेशान होकर मैं मामा के घर मुख्यमंत्री निवास तक पैदल जाना चाहती हूं। लगता है कि उन्होंने अब अखबार पढ़ना, टीवी देखना, सुनना बंद कर दिया है। तभी तो मेरी गुहार उन तक नहीं पहुंच रही है।

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