दिग्विजय सिंह ने अपने X अकाउंट पर लिखा, ‘मुझे दो हफ्ते पहले EVM हटाओ मोर्चा की ओर से 22 फरवरी को EVM से देश में लोकसभा चुनाव न कराने के मुद्दे को लेकर शांतिपूर्ण धरना देने का निमंत्रण प्राप्त हुआ था, जो मैंने स्वीकार किया।’
उन्होंने आगे लिखा, ‘2 दिन पहले शांति पूर्ण धरने की स्वीकृति भी निरस्त कर दी गई। क्या कारण है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र शासन क्यों इतना घबरा रही है? चूंकि, इस बार पूरे देश से हजारों लोग धरने में शामिल होने आ रहे थे, घबरा कर स्वीकृति निरस्त कर दी। अब ‘EVM हटाओ, लोकतंत्र बचाओ’ आंदोलन देश के गांव-गांव पहुंच रहा है। सुप्रीम कोर्ट को इसका संज्ञान लेना चाहिए।’
इलेक्शन कमीशन पर भरोसा नहीं
दिग्विजय सिंह ने कहा, ‘EVM का मुद्दा 2018 से चला आ रहा है। AICC के सर्वसम्मति से पारित राजनीतिक प्रस्ताव में यह उल्लेख था कि लोगों को EVM को लेकर शंका है, इसलिए चुनाव बैलेट पेपर से होना चाहिए। इसे लेकर कोई भी सवाल पूछने पर इलेक्शन कमीशन कोई जवाब नहीं देता है। हमें इलेक्शन कमीशन पर भरोसा नहीं है।’
उन्होंने कहा, ‘लोकतंत्र में जनता से बढ़कर कोई नहीं होता है। हम जनता के साथ मिलकर लड़ाई लड़ेंगे। BEL, जो EVM बनाती है, उसके चार डायरेक्टर्स भाजपा के नेता हैं। मांगने पर हमें टेक्निकल कमेटी के मेंबर की रिपोर्ट नहीं दिखाई जाती है। इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। कमेटी के सदस्य कौन होंगे? प्रधानमंत्री या उनका मनोनीत कोई मंत्री होगा। जो वो कहें, सो ठीक।’
