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गैंडे की विभिन्न किस्में कौन-सी हैं ?

गैंडे की विभिन्न किस्में कौन-सी हैं ?

भारतीय गैंडा जो देखने पर ऐसा लगता है जैसे उसने कई
भारी कवच पहन रखे हों, सुमात्रा का दो सींगों वाला काला गैंडा जो सबसे छोटे आकार का होता है

गैंडा धरती का सबसे विशाल हा स्तनपायी जीव है. गैंडे को अंग्रेजी में रिहनोसेरस (Rhinoceros) कहते हैं. इस नाम की उत्पत्ति ग्रीक भाषा से हुई है. ‘रिर्हनों’ का अर्थ ग्रीक में होता है : नाक और सींग, अर्थात् सींगयुक्त. इस जानवर की लंबी नाक पर एक या दों सींग होते हैं. ये सींग उम्र भर बढ़ते रहते हैं. गैंडा अंगुलेट्स के ऑडटोड (oddtoed) समूह का सदस्य होती हैं और हर उंगली का अलग खुर होता है. आगे के दोनों पैरों में एक चौथी उंगली भी होती है, जिसे अब यह प्रयुक्त नहीं करता है.

गैंडे की आज पांच किस्में पाई जाती हैं, अफ्रीका में और तीन एशिया में. अफ्रीका की दोनों किस्मों और सुमात्रा की एक किस्म के गैंडे के दो सींग होते हैं, परंतु भारतीय और जावा के गैंडों के केवल एक ही सींग होता है.

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भारतीय गैंडा

इन सभी किस्मों में अफ्रीका का सफेद गैंडा आकार में सबसे बड़ा होता है. इसकी कंधे तक की ऊंचाई 1.8 मी. और वजन लगभग 3 टन होता है. अफ्रीका के सफेद और काले गैंडे के होंठो के आकार में अंतर होता है. सफेद गैंडे का मुंह चौड़ा और चौकोर होता है, जो घास चरने के लिए बहुत ही उपयुक्त होता है. काला गैंडा कुछ तेज होता है. इसका ऊपर का होंठ नुकीला होता है, जिससे यह झाड़ियों की फूल पत्तियां आसानी से खा सकते है।

गैंडे का शरीर बहुत भारी होता है, पर टांगें छोटी, लेकिन जबूत होती इसके हर पैर में तीन उंगलियां उखाड़ कर खा सकता है. बाकी की सींगवाली दोनों किस्मों में से सुमात्रा का गैंडा सबसे छोटा होता है, यह लगभग 1½ मी. (4.5 फुट ऊंचा होता है और इसका भार एक टन से भी कम होता है.

गैंडा घास, पत्ती और जड़ें खाता है. यह भोजन के लिए दूसरे पशुओं का शिकार नहीं करता. यह विशाल पशु सामान्यतः शांतिप्रिय और एकांत में रहना पसंद करता है, लेकिन यदि इसे छेड़ने की कोशिश की जाए तो यह बहुत डरावना और आक्रामक हो जाता है. गैंडा लगभग 42 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकता है और अपने सींगों से शत्रु पर हमला कर सकता है.

गैंडे की खाल बिना बाल की और बहुत मोटी होती है. दूर से देखने पर ऐसा लगता है, जैसे इसने कई भारी कवच पहन रखे हों और सारे कवच आपस में काबलों से कस दिए गए हों. सींग उसकी नाक की हड्डियों पर निकले मोटे बालों की तरह होते हैं. ये खोपड़ी से जुड़े नहीं होते और कभी-कभी लड़ाई में टूट भी जाते हैं, पर ऐसी स्थिति में जल्दी ही ये फिर से निकल आते हैं. ये सींग 107 सेमी. तक लंबे होते हैं. मादा गैंडा एक समय में एक बच्चा देती है. इसका प्रसव काल 18 महीनों का होता है और इसका बच्चा कई सालों तक अपनी मां के साथ ही रहता है.

सही देखभाल में गैंडा 50 वर्ष तक जीवित रह सकता है. दोपहर की गर्मी से बचने के लिए गैंडा कीचड़ – पानी में रहना अधिक पसंद करता है. जब यह बाहर निकलता है, तो इसके सारे शरीर पर कीचड़ की पर्त जमी होती है. यह कीचड़ उसके शरीर पर ही सूख जाता है और गैंडे को मच्छरों आदि के काटने से बचाता है.

आजकल गैंडे कठिनाई से ही मिलते हैं. सदियों से आदमी इनके सींग प्राप्त करने के लिए इनका शिकार करता आ रहा है. प्राचीन काल से लोगों में यह अंधविश्वास चला आ रहा है कि इसके सींग अपने मालिक में शक्ति भर देते हैं, लेकिन अब सफेद और काले दोनों गैंडों की रक्षा कानून कर रहा है, ताकि धरती से ये विलुप्त न हो सकें.

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