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स्ट्रांग विल पावर के साथ कोरोना को देंगे मात

स्ट्रांग विल पावर के साथ कोरोना को देंगे मात

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किसी से भी फालतू बातें न करें और अगर कोई पूछे तब भी आपकी लैग्वेज सकारात्मक हो, जैसे-हा, बस कोरोना इंफेक्शन हुआ था अभी ठीक है. ये भाषा नकारात्मक से सकारात्मक सिर्फ तब होगी जब आपके विचार भी सकारात्मक होंगे. याद रखें इंसान अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से असंभव को भी संभव कर सकता है.

आजकल कोरोना महामारी का दौर चल रहा है. चारों ओर एक ही चर्चा है कि कोरोना ने विकट स्थिति उत्पन्न की हुई है एक ऐसी बीमारी जिसका कोई इलाज आज दुनिया के पास नहीं है और जो उपाय है वो सभी पर अलग-अलग तरह से अपना असर दिखा रहे हैं. इस समय दुनियाभर में इतनी नकारात्मकता व्याप्त है कि इंसान कुछ और सोच ही नहीं पा रहा है. हो सकता है आने वाले समय में इस बीमारी का इलाज खोज भी लिया जाए पर तब तक लोग इस हद तक मानसिक रूप से हताश हो चुके होंगे कि उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए फिर सरकारों को अभियान चलाने होंगे. आज हम इसी कोरोना महामारी या बीमारी और मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बताएंगे कि किस तरह से यदि आप सकारात्मक सोच रखते हैं, तो आप इस बीमारी से बाहर निकल आएंगे.

हमारे शास्त्रों में लिखा है कि हमारा शरीर 5 तत्वों से मिलकर बना है पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु व आकाश. जब हमारे शरीर में इन 5 तत्वों में से किसी तत्व की कमी या अधिकता होती है, तो हमे उससे संबंधित बीमारी हो जाती है और किसी भी बीमारी का इलाज दो स्तरों पर किया जाता है एक शारीरिक व दूसरा मानसिक क्योंकि दोनों एक दूसरे से जुड़े हुए हैं.. जरा सोचिए, जब आप बीमार होते हैं तो डॉक्टर आपको कोई ऐसी दवाई देते हैं जिसको खाने के बाद आपको नींद आती है और आपको आराम करने की सलाह दी जाती है, क्यों ? क्योंकि डॉक्टर जानते हैं शरीर में कुछ न्यूरो ट्रांसमीटर जिनको हम आम भाषा मे हार्मोन्स कहते हैं या तो बढ़े हुए हैं या कम स्रावित हो रहे हैं और ये हार्मोन्स मस्तिष्क से प्रभावित होते हैं, इसीलिए आपको नींद आए ऐसी दवाइयां दी जाती हैं.
सच ये है कि अगर आप अपने मन को शांत रखेंगे तो शरीर के ये पांचों तत्व बैलेंस बने रहेंगे. ऐसे में अगर कोई बीमारी हो भी जाती है तो शरीर मे बहने वाले हार्मोन्स उनसे निपटने में सक्षम होंगे जिसे हम कहते है इम्यून सिस्टम, यहां ये सब बताने का तात्पर्य सिर्फ इतना है कि आपके मन मे मस्तिष्क में इतनी शक्ति है। कि किसी भी बीमारी से बिना दवाई के भी लड़ सकती है, परंतु आज कोरोना को लेकर इतनी अफवाह फैला दी गई है कि लोग डरे हुए हैं और जितना लोग डरेंगे उनका इम्यून सिस्टम उतना ही कमजोर होता जाएगा. याद रखें, अगर आप किसी बीमारी से खुद से ठीक न होना चाहते हो तो आपको दुनिया की कोई दवाई ठीक नहीं कर सकती. अगर आप ठीक होना या रहना चाहते हैं, तो आप शरीर की सारी क्षमताओं से आगे अपने मानसिक बल के सहारे निकल जाएंगे. बस यही काम आपको इस बीमारी के साथ भी करना है. मानसिक रूप से स्वस्थ रहें, सकारात्मक सोचें. शरीर के पांचों तत्वों का बैलेंस बनाकर रखें.
पृथ्वी तत्व के लिए हरी सब्जियां खाएं जिससे प्रोटीन, विटामिन, आयरन सब शरीर को मिल जाएगा. वायु के लिए, ताजी हवा में सांस ले प्राणायाम करें. अग्नि के लिए धूप में जरूर बैठे जल के लिए थोड़ी-थोड़ी देर में ताजा पानी पीते रहें. आकाश के लिए घरों से बाहर न सही, अपने घरों की छतों पर तो जा ही सकते हैं. अपने आप को यकीन दिलाएं की आप स्वस्थ हैं. दिन में कई बार अपने दिमाग से शरीर को ये मैसेज भेजें कि आप स्वस्थ हैं.
सोशल मीडिया में चल रही अफवाहों से दूर रहें और अपने तर्क का प्रयोग करें. 100 में से 3 मरीजों की कोरोना के चलते जान जा रही है तो भी 97 मरीज तो ठीक होकर घर जा रहे हैं. इस पर भी तो ध्यान दीजिए और अपनी तर्कशक्ति का प्रयोग करें. क्या मरने वाले कोरोना से ही जा रहे हैं? या कोई और ऐसी बीमारी थी, जो उनके मरने का कारण बनी. जब आपका मस्तिष्क समस्या के बजाए उसके कारण के बारे में सोचने लगता है तो अवचेतन मन में उसके समाधान भी खोजने लगता है. इसलिए कैसी भी परिस्थिति हो, अपने मन को साधे रखिए, अब बात करते हैं कि आपको करना क्या है?
अगर आप कोरोना की चपेट में आ गए हैं या आपके परिवार में कोई कोरोना से बीमार हो गया है, वास्तव में आप करते ये हैं कि हर किसी को ये बताते हैं कि कोरोना हो गया हालात बहुत खराब है और हर किसी को ऐसे ही बताते हैं चाहे सिर्फ कमजोरी ही क्यों न हो या फिर सिर्फ बुखार कहने का तात्पर्य ये है कि आप जितनी बार ये बताते हैं कि बीमार हैं हालात बहुत खराब है, आप अपने मन से एक नकारात्मक मैसेज शरीर को भेजते है. जिससे बीमार करने वाले हार्मोन्स का साव तेजी से होने लगता है और स्थिति और ज्यादा खराब हो जाती है, तो अब करे क्या? करना ये है कि पहले तो लोगों से फालतू बाते न करें और अगर कोई पूछे तब भी आपकी भाषा सकारात्मक हो, जैसे हां, बस कोरोना हुआ था अभी ठीक है, ये भाषा नकारात्मक से सकारात्मक सिर्फ तब होगी जब आपके विचार भी सकारात्मक होंगे, याद रखें इंसान अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से असंभव को भी संभव कर सकता है.
सामाजिक दूरी नहीं, शारीरिक दूरी बनाएं, जैसे- हर बीमारी में आप खुद का और परिवार के अन्य सदस्यों का ध्यान रखते हैं, वैसे ही ध्यान रखें.
(लेखक- श्रीति सागर)

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